“नेहरू वंश बनाम मुग़ल खानदान”
स्वातंत्रोत्तर भारत में दिल्ली की सत्ता पर अधिकांश नेहरू खानदान का ही
राज रहा है | इस वंश या खानदान को काफी लोग मुग़ल खानदान से जोड़कर देखते है | ऐसा
कहने का उनके पास अपना तर्क भी है, और वे लोग तर्क का आधार है बताते है नेहरू के सेक्रेटरी
एम ओ मथाई की पुस्तक “रेमेनिसेंसेस ऑफ़ नेहरू एज” (जो भारत में प्रतिबंधित है) तथा
के एन राव की पुस्तक “द नेहरू डायनेस्टी” | ये
पुस्तके नेहरू के करीबियों ने लिखी है, और
इन में नेहरू परिवार के बारे में विस्तार से लिखा गया है | जो भी है पर हमारे पास नेहरू
वंश को मुग़ल खानदान से जुडा मानने के अलग तर्क है |
(१)- मुग़ल खानदान को भारत के इतिहास में इतना
महत्वपूर्ण और विस्तृत रूप से क्यों पढाया जाता है ? मुग़ल कक्षा 6 से
शुरू होकर बीए, एमए और फिर पीसीएस आईएएस की सर्वोच्च परीक्षाओ तक छात्रो और
अभ्यर्थियों का पीछा नहीं छोड़ते है | यदि हम ज्यादा पीछे भी न जाएँ तो भी महाराजा परिक्षत
से लेकर सम्राट पृथवीराज चौहान तक पढ़ने योग्य हमारा गौरवशाली इतिहास नहीं रहा क्या
? इस कालखंड में हम सोने की चिड़िया, जगतगुरु और परम वैभव शाली नहीं रहे क्या ? पर
पाठ्यक्रमो से सब गायब है |
(२)- 8 नवम्बर 2010 में भारत दौरे पर आये अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा को क्या हुमायूँ का मकबरा
ही मिला था दिखाने के लिए ? दिल्ली में तो पुराना किला जैसी एक से एक हजारो वर्ष
पुरानी एतिहासिक और दर्शनीय इमारते है |
(३)- अफगानिस्तान स्थित बाबर की जर्जर मजार पर
बार- बार नेहरू खानदान के लोग क्यों जाते है ? अफगानियों के लिए वो महत्वहीन है |
वे अपने को मुग़ल वंश से अलग करके देखते हैं | 2004 में राहुल और प्रधान मंत्री
मनमोहन सिंह गए | इंदिरा गाँधी भी सन 1968 ई. में अपने आई ऍफ़
एस अधिकारी नटवर सिंह (बाद में केन्द्रीय मंत्री) के साथ अपने कार्यकाल में जिद
करके वहां गई | ये लोग प्रोटोकोल तोड़ कर गए, अफगान सरकार के मना करने पर गए, वह
क्षेत्र तालिबानी आतंकवाद ग्रसित है तब भी ये लोग गए क्यों ? तब वहां पहुंचकर
इंदिरा गाँधी ने कहा था की “आज मैंने अपने को अपने इतिहास से जोड़कर अपना इतिहास
ताजा कर लिया |”
(४)– विश्व संस्था यूनेस्को ने इस बात पर आश्चर्य
व्यक्त किया है की “भारत में एक से बढ़ कर एक गैर मुगलकालीन बेहतरीन ऐतिहासिक स्मारक
स्थित हैं | पर न जाने क्यों यहाँ की सरकार मुगलकालीन स्मारकों की ही सिफारिश
विश्व धरोहर की सूचि के लिए करती हैं ? यहाँ की सरकारों को अपना नजरिया बदलना
चाहिए | और गैर मुग़ल स्मारकों को भी सूचि के लिए भेजना चाहिए | फ़िलहाल भारत की २७
स्मारक विश्व धरोहर सूचि में शामिल है लालकिला इनमे सबसे अंत में शामिल हुआ |” ये
विचार एक कार्यक्रम के दौरे पर 2009 ई. में भारत आयी यूनेस्को की संस्कृति
कार्यक्रम विशेषज्ञ मोइचिबा ने कहे | अब प्रश्न ये उठता है की मुग़ल स्मारकों
से ही इतना मोह क्यों ? वो भी ये विश्व संस्था कह रही है |
आखिर नेहरू व नेहरू के वंशजों का मुग़ल खानदान से
इतना प्रेम क्यों है ? मुगलों का इतिहास पढाया जाना, नेहरू के वंशजों का बार बार बाबर
की जर्जर मजार पर जाना, मुग़ल स्मारकों से बेहद लगाव का आखिर क्या कारण है ? ये सब
तथ्य नेहरू वंश को मुग़ल वंश से जोड़कर देखने को मजबूर करते हैं ||
No comments:
Post a Comment