Wednesday, 18 April 2018


                                       
          मेरा भारत महान :--
मेरा भारत यूँ ही महान नहीं है इसमे लाखों सालों की त्याग बलिदान और ऋषि मुनि व संतों की तपस्या का परिणाम है | मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को राज्याभिषेक होने वाला था | २ वचन लेकर बीच में कैकेयी आ जाती है | महाराजा दशरथ विवश हो जाते हैं | राम को पता चलता है स्वयम पिता दशरथ की विवशता देख राम निस्पृह भाव से वन गमन का वरन करते है | जबकि सब कोई बीच का रास्ता तलाश रहे थे | भरत वापस आते है | भारत को राजसिंहासन देने की बात होती है | लेकिन भरत ने भी एक पल के लिए भी राज्य स्वीकार नहीं किया | तभी तो राम हनुमान से कहते है == ‘तुम मम प्रिय भरत सम भाई’ | लक्षमण ने १४ साल वन में साथ गुजारे पर भरत सम भाई | कैसा निस्प्रह भाव था | राम ने युद्ध जीतकर लंका लक्षमण को भेजा की अपनी भाभी सीता को ले आओ और विभीषण का राज्याभिषेक कर आओ तथा रावण से कुछ ज्ञान की बातें भी पूछ लेना | लक्ष्मण कहता है की ‘भैया देखो वो सोने की लंका’ राम उत्तर देते हैं कि == ‘अपि स्वर्ण मई लंका न मे रोचते लक्ष्मण, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ ‘लक्षमण यद्यपि ये सोने की लंका है पर मुझे नहीं रोचती मेरे लिए तो जननी और जन्म भूमि ही स्वर्ग से भी बढकर है’ | राम ने लंका की ओर कोई बुरी दृष्टि नहीं डाली | जबकि राम का पूरा अधिकार था उस पर शासन करने का | बाली वध पर कुछ मुर्ख राम पर बाली का धोखे से वध का आरोप लगते है | उन्हें ये नहीं पता की युद्ध में सब उचित ही होता है | फिर बाली को वरदान प्राप्त था, कि युद्ध करते समय सामने वाले का आधा बल बाली में आ जायेगा | फिर तो बाली मरना ही असंभव था | लेकिन बाली पापी था अन्यायी था तो उसका मरना आवशक था | बाली को मारकर राम ने सुग्रीव को स्वतंत्र शासक बनाया | साथ ही बाली की पत्नी तारा पटरानी बनाई और बलि पुत्र अंगद को सेनापति बनाया | उस राज्य को छुआ भी नहीं | सारा राजपाट सुग्रीव को दे दिया | द्वापर में कृष्ण ने कंस को मारकर मथुरा का शासन बार बार मना करने पर भी स्वयं न लेकर कंस के वृद्ध पिता महाराजा उग्रसेन को ही दे दिया था | मगध के शक्तिशाली नरेश जरासंध को मारकर उसके पुत्र सहदेव को मगध का शासक बनाया | एक दिन इसी जरासंध के कारण कृष्ण को मथुरा छोड़ना पड़ा था और रणछोड़जी कहलाये | फिर कृष्ण और भीम और अर्जुन जरासंध को उसके के घर मगध पर ही जाकर उसको द्वंद युद्ध में मारकर आये थे |
शिशुपाल ने भरी सभा में सभी का अपमान किया था | भीष्म, कुंती से लेकर युधिष्ठिर तक किसी को नहि छोड़ा था | बलराम को भी क्रोध आ गया था | पर कृष्ण ने कुछ नहीं कहा था | क्योंकि कृष्ण ने शिशुपाल की माँ जो कृष्ण की बुआ और कुंती की बहन श्रुतिश्रवा थी, को शिशुपाल के सौ अपराध क्षमा करने का वचन दे रखा था | १०१ वी गाली पर कृष्ण का सुदर्शन चल गया और शिशुपाल का सर धड से अलग हो गया | यहाँ भी उसका राज्य किसी ने छुआ नहीं | उसी सभा में जो महाराजा युधिष्ठिर के राज्याभिषेक के लिए आहूत थी | उस में उपस्थित शिशुपाल के पुत्र महिपाल का राज्याभिषेक कर दिया गया | ऐसी महान गरिमामई परम्परा थी अपनी |

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