Friday, 13 January 2012


              “स्वामी विवेकानंद”
जब भारत पर अंधकार का घना कुहासा छाया था | अध्यात्म और ज्ञान के बल पर विश्व का मार्ग दर्शन करने वाली माँ भारती परतंत्रता की बेडियो में जकड़ी थी | प्रकाश की किरण दिखाई नहीं देती थी | तब सोमवार १२ जनवरी १८६३ को कलकत्ता में स्वामी विवेकानंद (नरेंद्र) को वीर  प्रसूता भारत माँ ने एक ऐसे लाल को जन्म दिया ,जिसने विश्व को बता दिया की कोई शक्ति भले ही कुछ समय के लिए हथियारों ,कुटिल चालो और के बल पर गुलाम बना ले पर ज्ञान और आध्यात्म के मामले में दुनिया माँ भारती से बोनी ही रहेगी | उनका आभारी भारत १२ जनवरी को “युवा राष्ट्र दिवस “ के रूप में मनाता है | उनके बारे में बहुत सारी बाते है पर मैं एक ही प्रसंग का जिक्र करूगां | स्वामीजी का “११ सितम्बर १८९३ शिकागो” का वेदांत दर्शन पर विश्व प्रसिद्ध भाषण कोन नहीं जानता ,जिसके द्वारा उन्होंने बता दिया की दुनिया वालो तुम भारत को भोतिक गुलाम तो बना सकते हो पर आध्यत्मिक गुलाम तुम्ही भारत के रहोगे | वहाँ स्वामी जी ने कहा था की  “आध्यत्म ज्ञान और भारत दर्शन के बिना विश्व अनाथ है” | ये भारत दर्शन का “आध्यत्मिक विस्फोट” था जिसने विश्व को भारत का गुलाम बना दिया |  ११ सितम्बर की इस घटना के ठीक १०८ वर्ष बाद ११ सितम्बर २००१ को  मुश्लिम दर्शन का विस्फोट “विश्व व्यापर केन्द्र “ पर हुआ | और विश्व को इस्लाम का दुश्मन बना दिया | ये दो सभ्यताओ का अपने –अपने दर्शन का प्रदर्शन था | इसके बारे में दो काव्य पंक्तिया सटीक बैठती है -
      “ कीचड़ इसके पास था उसके पास गुलाल ,
        जिसके जो भी पास था उसने दिया उछाल “
   
  || ऐसे महापुरुष को उनकी जयंती पर कोटि कोटि नमन ||

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