“गोहत्या पर ज्वलंत प्रश्न”
गोवंश का कटान आज
भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में प्रमुख वृहद् लाभकारी उद्योग का रूप धारण
कर चूका है | परन्तु इस कटान के बचाव में अक्सर मुसलमान व सैकुलरवादियो के अलावा
आम निष्क्रिय हिन्दू को भी ये कहते सुना जा सकता है की “गोवंस को कटान के लिए
बेचता तो हिन्दू ही है” | ये बेहूदा कुतर्क है | ऐसा कहने वाले परोक्ष रूप से
गोकशो का समर्थन कर रहे है | उनसे कुछ प्रश्न है --(१) सीधे हिन्दू से अब कोई कसाई
गोवंश नहीं खरीदता है | गोवंश के खरीदने से लेकर कतलखाने तक ले जाने तक का काम ये
हिन्दुओ के माध्यम से करते है, हाँ यातायात के समय हथियारबंद कसाइयो का गिरोह पशु
ले जाते वाहनो को सुरक्षा अवश्य प्रदान करता है | चलो मान ले कि हिन्दू गाय न बेचे
पर बैलो का व्यापर तो पहले से होता रह है और होता रहेगा इससे कैसे बचा जायेगा, और
मुसलमान भी बहुत बड़ी संख्या में गोवंश का पालन करता है, इसके अलावा चोरी कर के और
जंगल से घुमते गोवंश को भी पकड़ कर काट दिया जाता है | (२) गोवंश का कटान, और किसी
की (हिन्दुओ की) धार्मिक भावनाओ को ठेस पहुचाना कानूनन अपराध है क्या इन कानूनो की
कोई कीमत नहीं ? (३) जहाँ तक हिन्दुओ के बेचने की बात है तो हिन्दू तो सूअर भी
बेचता है ये जानवर तो बना ही मांस के लिए है इसे कसाई क्यों नहीं खरीदते ? (४) हाल
ही में मुस्लिम बबालिओ ने मसूरी थाना (गाजियाबाद) जला दिया विवाद का कारण बना
कुरान का पन्ना | कभी रद्दी में कभी लिफाफे में कभी सड़क पर कुरान के पन्ने को लेकर
ऐसी घटना का होना आम बात है | आखिर ये पन्ना आता कहाँ से है ? हिन्दू को क्या पता
कि ये क्या है ? आखिर ये मुसलमान के घर से ही तो आया न फिर भी बबाल हिन्दुओ के साथ
| इस पर सेकुलर क्यों नहीं कहते कि कुरान का पन्ना मुस्लमान घर से बहार डालते ही
क्यूँ है ? (५) व्यापारियों कि नकदी लूट पर कल कहा जायेगा कि व्यापारी मोटी नकदी
लेकर चलते ही क्यों है ? (६) अब एक अंतिम- प्रश्न बढती हिन्दू लड़कियों कि छेड़छाड़
पर कल मुसलमान और सेकुलर कहेंगे कि हिन्दू लडकियों को बहार निकलते ही क्यों है ?
तब मेरे निष्क्रिय हिन्दू भाइयो क्या कहोगे ?
वैसे १९४६ में जिन्ना की सीधी ‘कार्यवाही’ के
आह्वान पर हुए नोआखाले में हिन्दुओ के कत्लेआम पर मुसलमान एक बार ऐसा कह चुके है
कि “जब हिन्दू लडकिया है ही इतनी सुन्दर कि मुसलमान लड़के अपने को रोक नहीं पाते तो
हम क्या कर सकते है” ||

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