"जाट
आरक्षण और भाजपा"
चुनावी लाभ लेने के लिए २०१४ के लोकसभा
चुनाव से एकदम पहले कांग्रेस ने जाट आरक्षण का कार्ड चला था
| जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने ये कहते हुए कि जाति के आलावा
शैक्षिक और आर्थिक आधार का भी ध्यान रखना चाहिए था मार्च १५ में अमान्य कर दिया
| पहले से ही भाजपा से नाराज चल रहे जाटो को एक और भाजपा के विरुद्ध
मुद्दा मिल गया | भाजपा ने आश्वासन दिया है साथ ही भाजपा के
सांसदों मंत्रियों को जाटों को मनाने के लिए लगाया गया है | पर
यहाँ ये विचार स्मरणीय है की भाजपा सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध कैसे जाएगी | भारत की राजनीति में एक शाहबानो प्रकरण हुआ था | जिसमे
कांग्रेस ने संसद में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलट दिया |
तब भाजपा ने इसे न्यायालय का अपमान कह कर कांग्रेस की खिचाई की थी | और भाजपा आज
भी उस मुद्दे को भूली नहीं है | अब भाजपा सुप्रीम कोर्ट के
निर्णय के विरुद्ध किस मुंह से जाएगी
|
क्या था शाहबानो प्रकरण --- एक ६२ वर्षीय मुस्लिम महिला शाहबानो को उसके
पति ने १९७८ में तलाक दे दिया था | शरियत में तलाक आम
बात है | पर शाहबानो भरण पोषण के लिए अदालत चली गई, और ये मुक़दमा ७ साल तक चलकर नीचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया
| १२५ की दंड प्रक्रिया संहिता में "हर किसी को गुजरा भत्ता पाने
का अधिकार है" ऐसा कह सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो के पति को गुजरा भत्ता देने
का आदेश दिया | कट्टर पंथी मुसलमानों ने इस निर्णय को शरियत
के खिलाफ माना और विरोध किया | १९८६ में दो तिहाई बहुमत वाली
राजीव गाँधी की सरकार थी आखिर उसे भी झुकना पड़ा और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को
उलटते हुए "मुस्लिम महिला तलाक संरक्षण कानून १९८६" पास कर दिया | अब
तलाक शुदा मुस्लिम महिला को गुजरा भत्ता नहीं
मिलेगा | तब से लेकर आज तक भाजपा इसे सुप्रीम कोर्ट
का अपमान और कट्टर पंथियों के सामने कांग्रेस का झुकाना बताती है | अब ये ही काम भाजपा सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ जा कर कैसे कर सकती है | वैसे भी जाट २ से २`५ प्रतिशत है और १२ से १५
प्रतिशत संसाधनों का लाभ ले रहे है | दूसरी बात ये भी है की
ओबीसी के २७ % में ३ जातियां जाट, गुर्जर और यादव ही हावी है | शेष ओबीसी जातियां घाटे
में है ऐसा इन जातियों का आरोप है |
यहाँ एक बात और स्मरणीय है की राजनाथ सिंह
ने अपने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रित्व काल में ओबीसी के अंतिम पायदान की जातियों
को लाभ देने के लिए ओबीसी के ३ टुकडे किये थे और आरक्षण को २७ से २८ % किया था जिसमे ओबीसी की ८० जातियों का बंटवारा इस प्रकार
किया था - (१) - पिछड़ा २ जातियां (५%), (२) - अति पिछड़ा ८ जातियां
(९%) तथा (३) - अत्यंत पिछड़ा ७०
जातियां १४% | राजनाथ सिंह ने अनुसूचित जातियों के अंतिम
पायदान की जातियों को भी लाभ देने के लिए अ.जा. आरक्षण का भी विभाजन किया था
| जो इस प्रकार था अ.जा.
की कुल जातियां ६८ | (१) - दलित ३
जातियां (१० %), (२) - अति दलित ६५
जातियां (११%) | ये एक सुन्दर व्यवस्था थी लेकिन चल नहीं पाई
क्योंकि बाद की सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया और राजनाथ सिंह का दोनों
वर्गों के आरक्षण में अंतिम पायदान की जातियों को मिलने वाला लाभ नहीं मिल पाया
साथ ही राजनाथ सिंह को भी राजनैतिक लाभ नहीं मिला |(जातियों
के आंकड़े सन २००० के है ) |
पुन: जाट
आरक्षण पर आते है | जाट सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को भाजपा की
लचर पैरवी मान रहे है | परन्तु सच्चाई ये है की ये आरक्षण
सु. को. के दरवाजे से बहार आना ही नहीं था ये तभी से प्रबुद्ध लोग और प्रबुद्ध जाट
भी कह कर चल रहे थे | हर बुद्धिजीवी व स्वयं सुप्रीम कोर्ट
भी कह रहा है की आरक्षण जातिगत नहीं आर्थिक आधार पर होना चाहिए पर राजनैतिक दलों
के लिए वोटो का लालच ऐसा नहीं होने देता | जाटों का भाजपा से
नाराजगी के अन्य कारन भी है, एक लोकदल का सत्ता शून्य होना और दूसरा जाट भवन खाली
कराना | इस नाराजगी को लेकर जाट मोदी को माफ़ करने के मूड में
नहीं दिखते | अत: जाट कोई भी मौका हाथ
से नहीं जाने देना चाहते | वैसे भी जाट आरक्षण का लाभ किसी को नहीं मिला | भाजपा को इस समस्या
का स्थाई, सर्वमान्य और सम्मानजनक हल खोजना होगा | साथ ही जाटों को सीमा से बाहर जाकर मनाना अन्य जातियों की नाराजगी का कारण
न बन जाये भाजपा को इस बात को भी ध्यान में रख कर चलना होगा | मोर्य, शाक्य, कुशवाह आदि
जातियां ने तो जाट आरक्षण का विरोध शुरू भी कर दिया है | ये
गंभीर समस्या भाजपा के गले की हड्डी न बन जाये |||

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