Sunday, 24 May 2015

“कुरुक्षेत्र और ओरंगजेब ---- (ब्रह्म सरोवर, सन्नहित सरोवर, ज्योतिसर)”

       “कुरुक्षेत्र --- (ब्रह्म सरोवर, सन्नहित सरोवर, ज्योतिसर)”
कुरुक्षेत्र महाभारत का पवित्र एवं प्रमुख स्थान है | महाभारत युद्ध में गीता का ज्ञान यहीं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया था | गीता का प्रथम श्लोक ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे ------‘ से ही प्रारंभ होता है | महाकवि रामधारी सिंह दिनकर का महाकाव्य कुरुक्षेत्र को हिंदी के १०० टॉप काव्यों में ७४ वां  स्थान प्राप्त है | यह तीर्थ ब्रहम सरोवर, सन्निहित सरोवर और ज्योतिसर को मिलकर बना है |
विषय की बात करें तो ओरंगजेब ने अपने शासनकाल में अन्य हिन्दू तीर्थों की तरह कुरुक्षेत्र में कर लगा दिया था जो ४ आना एक लोटा जल और एक रूपया स्नान पर था, और ये कर स्वतंत्र भारत में कांग्रेसराज पर भी चलता रहा | १९६८ में गुलजारीलाल नंदा चुनाव लड़ने के लिए कुरुक्षेत्र पधारे | वहां उन्हें तीर्थ की दुरावस्था के बारे में पता चला | नंदा जी ने कुरुक्षेत्र के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया | उन्होंने ‘कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड’ की स्थापना की नंदा जी स्वयम उसके चेयरमैंन बने | तीनो सरोवरों (ब्रह्म सरोवर, सन्निहित सरोवर और ज्योतिसर) का कायाकल्प हुआ | ओरंगजेब ने इस तीर्थस्थान का नाम भी परिवर्तित कर मुगलपुरा कर दिया था, जो नंदा जी के प्रयासों से पुराना नाम बदलकर पुरुषोत्तम पूरा कर दिया गया | साथ ही सभी कर भी हटा दिए गए | स्मरण रहे की गुलजारीलाल नंदा तीन बार भारत के प्रधान मंत्री रहे |
कुरुक्षेत्र पर लिखी गई दिनकर की काव्यपंक्ति हिंदी साहित्य की अनमोल कृति है जो अक्सर काव्य प्रेमी गुनगुनाते है ----- क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो,
                   उसको क्या जो दंतहीन, विषहीन, विनीत सरल हो ||
छठी शताब्दी के भारत के प्रसिद्ध न्यायप्रिय राजा हर्ष की राजधानी थानेश्वर ( स्थानेश्वर) भी समीप है | सन्निहित सरोवर में पिंडदान का बड़ा महत्त्व है | कहते है की पौराणिक नदी सरस्वती भी यहीं  से प्रवाहित होती थी | ये बड़ा ही पुनीत स्थल है इसकी ८४ कोस की पौराणिक सीमा है | यहाँ की धूल भी प्राणी को पाप मुक्त करने की क्षमता रखती है | इसे बसाया भी महाराजा कुरु ने ही था इसी लिए इसका नाम कुरुक्षेत्र पड़ा | पुन्य स्थल होने के कारण ही यहाँ महाभारत लड़ा गया | यहाँ मरने वाला सीधा स्वर्ग जाता है | धन्य हैं गुलजारीलाल नंदा जिन्होंने इसका जीर्णोद्धार किया | सोमनाथ कुरुक्षेत्र का तो जीर्णोद्धार हो गया अयोध्या काशी मथुरा की बारी है |         
                                                                                                                                               






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