Saturday, 21 July 2018

मेला नौचंदी --- 2



               “मेला नौचंदी”--- 2 
  
मेले के प्रसिद्द द्वार :-
(1) - शम्भूदास द्वार :- मेरठ – हापुड़ मार्ग पर नौचंदी मेले का सबसे पुराना, भव्य और लम्बे समय तक एकमात्र द्वार रहा | इसे श्रीमती बिशनदेवी ने अपने पति स्व. श्री शम्भूदास जो पेशकर थे, की स्मृति में सन 1921 ई. में बनवाया था | यह आज भी मेले का मुख्य द्वार है | इससे सटकर ही मेले का बाजार लगता था | आज तो मेले ने बड़ा रूप धारण कर लिया है |
(2) - इंदिरा द्वार :- मेरठ - गढ़मुक्तेश्वर मार्ग की ओर से मेला नौचंदी जाने के लिए इंदिरा द्वार से ही मेले में प्रवेश होगा | यह द्वार प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गाँधी की याद में सन 1985 ई. में बवाया गया था | गढ़मुक्तेश्वर रोड की और से आने वाले इसी मार्ग का प्रयोग करते है |
(3) - शहीद द्वार :- इस द्वार का निर्माण जिला परिषद् ने सन 1966 ई. में जिले के उन शहीद सैनिकों की स्मृति को चिरस्थाई रखने को कराया था, जिन्होंने 1964 ई. के भारत –पाक युद्ध में मात्रभूमि पर प्राण न्योछावर किये थे | इस बड़े द्वार में 2 छोटे उपद्वार एक मेजर रणबीर सिंह द्वार और दुसरे मेजर आसाराम त्यागी द्वार के नाम से जाने जाते है | इस द्वार पर उन 47 अफसर और जवानों के नाम भी अंकित है जिन्होंने युद्ध में प्राण न्योछावर किये थे| 
(4) - विजय द्वार :- मेरठ - हापुड़ मार्ग पर शम्भूदास द्वार से आगे विजय द्वार है | अत्याधुनिक स्थापत्य के आधार पर बने इस द्वार का निर्माण 1972 ई. में संयुक्त मेला नौचंदी समिति ने कराया था | इस द्वार का निर्माण 1971 ई. के भारत – पाक युद्ध, या बांग्लादेश निर्माण में मारे गए भारतीय सैनिकों की याद में उनकी क़ुरबानी को अमर रखने को कराया गया था | इस युद्ध में मेरठ के 74 सैनिक घायल हुए थे | इस द्वार का उद्घाटन भारत के प्रथम फिल्ड मार्शल जनरल एस एच ऍफ़ जे मानेकशा ने किया था | इस द्वार पर बड़ा सा राष्ट्रिय ध्वज बना है |
मेले के प्रसिद्द स्थल :-
(1)   - चंडी देवी का मंदिर और (2) - बाले मियां की मजार का वर्णन तो ऊपर कर आये है |
(2)   – जय जवान जय किसान स्तम्भ – भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की याद में उनके प्रिय उद्घोष जय जवान जय किसान को प्रतीक के रूप में बनाया गया | जिसमे एक जवान एक हाथ में शस्त्र एक किसान हाथ मे गेंहू की बाली और दोनों एक एक हाथ से राष्ट्रिय ध्वज को एक साथ पकडे हुए हैं |
(3)   – अशोक स्तम्भ - मेला क्षेत्र के मध्य में अहिंसा का सन्देश देती सम्राट अशोक के प्रसिद्द अशोक स्तम्भ की अनुकृति लगी है | इसके शीर्ष पर भारत का राज चिन्ह बना है | 
(4)   – डा. आंबेडकर की प्रतिमा – भारत के संविधान निर्माण में अग्रणी डा. भीमराव आंबेडकर की भी आदमकद प्रतिमा मेला क्षेत्र में लगी है |
(5)   – पटेल मंडप – मेला क्षेत्र में होने वाली संस्कृतिक गतिविधियों का स्थल पटेल मंडप है | इसमे संगीत, नृत्य, कवि सम्मलेन, मुशायरा, पंजाबी कवि दरबार आदि कार्यक्रम होते है | पहले इसका नाम दरबार हाल था | 1951 ई. में नौचंदी के अवसर पर इसका नाम बदल कर शहर के मशहूर उद्द्योगपति न्यादर अली के नाम पर कर दिया गया | जिसका विरोध मेला देखने गए राजेन्द्र पाल गोयल और महाबीर प्रसाद आदि कुछ युवा छात्रों ने किया, धरना दिया | गिरफ्तार हुए मुकदमा हुआ |  उनकी मांग थी की किसी महापुरुष  के नाम पर हाल का नया नामकरण हो | छात्रों की मांग पर दरबार हाल का नाम बदलकर सरदार पटेल के नाम पटेल मंडप कर दिया गया | ये नौचंदी मेले का संक्षिप्त ज्ञात इतिहास है |




                       
                           



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