Wednesday, 4 July 2018


               
"चेरामन पेरूमल जुमा मस्जिद”
अयोध्या में राम मंदिर का न होना और बाबरी मस्जिद का होना हिंदुओं के लिए गहन टीस का विषय है | हिन्दुओं के मस्तिष्क पर कलंक के सामान है | हो भी क्यों न आखिर एक आततायी बाबर ने भव्य राममंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद जो बनाई थी | पीढ़ियों से हिन्दू इस कलंक को ढो रहे हैं | पर यहाँ तो आक्रान्ता ने बलात छीनकर मस्जिद बनाई | पर भारत की तो पहली मस्जिद भी मंदिर पर ही 629 ई. में बनी और आज तक खड़ी भी है | केरल के कोंडगलुर तालुका त्रिशुर जिले के मेथला गाँव में स्थित है ये चेरामन पेरूमल जुमा मस्जिद | इसे भारत की प्रथम और विश्व की दूसरी जुमा मस्जिद होने का सौभाग्य प्राप्त है | दरअसल इसके साथ कई स्मृतियाँ भी जुडी है | एक तो यह मोहम्मद साहब के जीवन काल में ही बन गई थी | दुसरे अरब के बहार बनने वाली भी यह पहली मस्जिद है | एक बार केरल का व्यापारी चेरामन अरब में व्यापर और तीर्थ यात्रा को गए | वहां जेद्दा में इस्लाम प्रचारकों से इनकी मुलाकात हुई | तो इस्लाम से प्रभावित होकर मुसलमान बन गया | और वहां के राजा की बहन से शादी कर वहीं बसकर ताजुद्दीन नाम रख लिया | मरने से पहले चेरामन ने जेद्दा के शासक को केरल और कोंडगलुर के राजा के नाम कुछ पत्र लिखकर दिए | जिनमे इस्लाम के प्रचारकों को केरल में धर्म प्रचार करने की छूट और रहने व नमाज आदि को स्थान देने की बात कही थी | इन्ही पत्रों के आधार पर कोंडगलुर के राजा ने बाद में इस्लाम प्रचारकों (मोलवियों) को मेथला गाँव का अरतली मंदिर दे दिया | जिसे मोलवियों ने जुमा मस्जिद में बदलकर नमाज पढ़ना शुरू कर दिया, पर धर्म निरपेक्षता की मिसाल के तौर पर नाम चेरामन पेरूमल जुमा मस्जिद ही रहने दिया जो आज तक चल रहा है | चूँकि निर्माण हिन्दू कारीगरों ने किया था | तो कला और वास्तुशिल्प पर हिन्दू शैली की स्पष्ट झलक मिलती है | वैसे भी मस्जिद का अधिकांश भाग तो मंदिर का ही था | मस्जिद के साथ 3 मुस्लिम प्रचारकों \ मोलवियों की कब्रें भी है | दरसल केरल के मालाबार तट से मोहम्मद साहब के बहुत पहले से भारत और अरब देशों के व्यापारिक रिश्ते थे | ये क्षेत्र भारतीय मसालों का बड़ा व्यापारिक केंद्र था | जो विश्व को अपनी ओर आकृष्ट करता था | मस्जिद की प्रबंध समिति के अध्यक्ष मोहम्मद सईद का कहना है की मस्जिद का भीतरी भाग आज भी 15 वी शती का है | तब इसमे बोद्ध धर्म की पूजा होती थी | अब इसको यथा संभव पुराने स्वरूप में लोटने की तैयारी चल रही है |        

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