Friday, 23 March 2012


                                     “नव वर्ष गीत”
सुनो सुनाते है तुमको हम महिमा ये नव वर्ष की ,
हर  हिंदू  के  हर्ष  की  भारत के  उत्कर्ष  की |
                  सूरज ने आ  सबसे पहले भारत माँ को परणाम किया ,
 छिटका कर यहाँ धवलचन्द्रिका चंदा ने गुणगान किया ||
                         इसी भुवि  पर ब्रहमदेव ने  रची सृष्टि  प्यारी प्यारी |
                         देह धारण  कर इसी धरा  पर देव हुए थे  बलिहारी ||
                          बलवती  रहे कामना  उर में माँ के चरण स्पर्श की |
                          सुनो सुनाते है तुमको हम .............................|| १ ||
चैत्र सुदी  प्रतिपदा  को इस  सृष्टि  ने जन्म लिया |
काल नियन्ता ब्रह्मा ने भी गणना को आरम्भ किया ||
समय चक्र को महाकाल ने इसी दिवस गतिमान किया |
गगन धरा जड़ ओ चेतन ने इसी दिवस का मान किया ||
हाय ! भुला दी  बाते  हमने  क्यों  बीते  आदर्श  की |
सुनो सुनाते है तुमको ........................................|| २ ||
                        इसी दिवस को दयानंद ने आर्य धर्म का सृजन किया |
                        वैदिक संस्कृति फैली जग में आडम्बर का दहन किया ||
                        सत्य ,स्वराज, दलित, नारी का भारत में सत्कार किया |
                        खोया वैभव पाया फिर से ज्ञान ध्वजा ले प्रचार किया ||
देकर विष ऋषि प्राण हर लिये कथा बड़े अपकर्ष की |
सुनो सुनाते है तुमको हम ...............................|| ३ ||
चैत्र मास में ही दशरथ घर अवतारी  श्रीराम  हुए |
भुवनभास्कर दक्षिणपथ से उत्तरायण गतिमान हुए ||
सिंह वाहिनी माँ शक्ति ने नव दुर्गे अवतार  लिये |
विश्व विजेता पुनः बने  हम बातें  है विमर्श की |
सुनो सुनाते है तुमको हम .........................|| ४ ||
                        शीत त्याग कर प्रकृति भी मदमाती  इठलाती है |
                        सकल धरा भी भीनी भीनी षोडषी सी शरमाती है ||
                        देदे लोरी मलय पवन भी तन मन सुख उपजाती है|
                        गंगा यमुना सरस्वती की ये संस्कृति कहलाती है ||
                        सदा  रही  है विजय  यात्रा  गोरव के संघर्ष की |
 सुनो सुनाते है तुमको .............................|| ५ ||
त्रेता युग में दैत्य राज ने मानवता का हरण किया |
मर्यादा पुरुषोत्तम ने तब दानवता का दलन किया ||
इसी दिवस पर दशरथसुत ने सिहासन का वरण किया |
जनजन के अराध्य राम को देवो ने भी नमन किया ||
भूल  गए क्यों इस  महिमा को बाते है  आमर्ष  की |
सुनो सुनाते है तुमको हम ...............................|| ६ ||
                        बढ़ा अधर्म द्वापर युग में तब श्री कृष्ण अवतार हुआ |
छल-प्रपंच अन्याय  अनीति का भारत पर प्रहार हुआ ||
बीच सभा में शील  हरण को  दु:शासन  तैयार  हुआ |
विजय धर्म की हुई अधर्म पर धर्मराज स्वीकार हुआ ||
विजय पताका  फैली  जग में  घटना  है आकर्ष की |
सुनो सुनाते है तुमको हम .............................|| ७ ||
सिन्धी भाई  इसी दिवस को चैती चांद मनाते है |
झूलेलाल जन्म धारण कर मानव रूप में आते है ||
चैत सुदी में ही युग दृष्टा केशव राव भी आते है |
हिन्दू के हित चिन्ता में संगठन का पाठ पढाते है ||
पश्चिम संस्कृति विषय हो गई चिन्तन के निष्कर्ष की |
सुनो सुनाते है तुमको हम ................................|| ८ ||
                        द्विशताब्दी पूर्व  शको ने भारत  को पदकान्त किया |
भारत ही क्या पूर्ण एशिया को भी तो दिग्भ्रांत किया ||
उज्जैयनी के विक्रम ने तब शको हुणों को शान्त किया |
विजयदिवस में राजतिलक ले भारत को अक्लांत  किया ||
वैभवशाली  सदा  रहे  छवि  अखण्ड   भारत  वर्ष की |
सुनो सुनाते है तुमको हम ..................................|| ९ ||
सुनो सुनाते है तुमको हम महिमा ये नव वर्ष की ,
हर  हिंदू  के हर्ष  की  भारत  के  उत्कर्ष की ||                                

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