“नव वर्ष गीत”
सुनो सुनाते है तुमको हम महिमा ये नव वर्ष की ,
हर हिंदू के हर्ष की भारत के उत्कर्ष की |
सूरज ने आ सबसे पहले भारत माँ को परणाम किया ,
छिटका कर यहाँ धवलचन्द्रिका चंदा ने गुणगान किया ||
इसी भुवि पर ब्रहमदेव ने रची सृष्टि प्यारी प्यारी |
देह धारण कर इसी धरा पर देव हुए थे बलिहारी ||
बलवती रहे कामना उर में माँ के चरण स्पर्श की |
सुनो सुनाते है तुमको हम .............................|| १ ||
चैत्र सुदी प्रतिपदा को इस सृष्टि ने जन्म लिया |
काल नियन्ता ब्रह्मा ने भी गणना को आरम्भ किया ||
समय चक्र को महाकाल ने इसी दिवस गतिमान किया |
गगन धरा जड़ ओ चेतन ने इसी दिवस का मान किया ||
हाय ! भुला दी बाते हमने क्यों बीते आदर्श की |
सुनो सुनाते है तुमको ........................................|| २ ||
इसी दिवस को दयानंद ने आर्य धर्म का सृजन किया |
वैदिक संस्कृति फैली जग में आडम्बर का दहन किया ||
सत्य ,स्वराज, दलित, नारी का भारत में सत्कार किया |
खोया वैभव पाया फिर से ज्ञान ध्वजा ले प्रचार किया ||
देकर विष ऋषि प्राण हर लिये कथा बड़े अपकर्ष की |
सुनो सुनाते है तुमको हम ...............................|| ३ ||
चैत्र मास में ही दशरथ घर अवतारी श्रीराम हुए |
भुवनभास्कर दक्षिणपथ से उत्तरायण गतिमान हुए ||
सिंह वाहिनी माँ शक्ति ने नव दुर्गे अवतार लिये |
विश्व विजेता पुनः बने हम बातें है विमर्श की |
सुनो सुनाते है तुमको हम .........................|| ४ ||
शीत त्याग कर प्रकृति भी मदमाती इठलाती है |
सकल धरा भी भीनी भीनी षोडषी सी शरमाती है ||
देदे लोरी मलय पवन भी तन मन सुख उपजाती है|
गंगा यमुना सरस्वती की ये संस्कृति कहलाती है ||
सदा रही है विजय यात्रा गोरव के संघर्ष की |
सुनो सुनाते है तुमको .............................|| ५ ||
त्रेता युग में दैत्य राज ने मानवता का हरण किया |
मर्यादा पुरुषोत्तम ने तब दानवता का दलन किया ||
इसी दिवस पर दशरथसुत ने सिहासन का वरण किया |
जनजन के अराध्य राम को देवो ने भी नमन किया ||
भूल गए क्यों इस महिमा को बाते है आमर्ष की |
सुनो सुनाते है तुमको हम ...............................|| ६ ||
बढ़ा अधर्म द्वापर युग में तब श्री कृष्ण अवतार हुआ |
छल-प्रपंच अन्याय अनीति का भारत पर प्रहार हुआ ||
बीच सभा में शील हरण को दु:शासन तैयार हुआ |
विजय धर्म की हुई अधर्म पर धर्मराज स्वीकार हुआ ||
विजय पताका फैली जग में घटना है आकर्ष की |
सुनो सुनाते है तुमको हम .............................|| ७ ||
सिन्धी भाई इसी दिवस को चैती चांद मनाते है |
झूलेलाल जन्म धारण कर मानव रूप में आते है ||
चैत सुदी में ही युग दृष्टा केशव राव भी आते है |
झूलेलाल जन्म धारण कर मानव रूप में आते है ||
चैत सुदी में ही युग दृष्टा केशव राव भी आते है |
हिन्दू के हित चिन्ता में संगठन का पाठ पढाते है ||
पश्चिम संस्कृति विषय हो गई चिन्तन के निष्कर्ष की |
सुनो सुनाते है तुमको हम ................................|| ८ ||
द्विशताब्दी पूर्व शको ने भारत को पदकान्त किया |
भारत ही क्या पूर्ण एशिया को भी तो दिग्भ्रांत किया ||
उज्जैयनी के विक्रम ने तब शको हुणों को शान्त किया |
विजयदिवस में राजतिलक ले भारत को अक्लांत किया ||
वैभवशाली सदा रहे छवि अखण्ड भारत वर्ष की |
सुनो सुनाते है तुमको हम ..................................|| ९ ||
सुनो सुनाते है तुमको हम महिमा ये नव वर्ष की ,
हर हिंदू के हर्ष की भारत के उत्कर्ष की ||
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