“पद्मनाभं मंदिर का खजाना
खतरे में”
ये तो आप जानते है कि केरल के तिरुअन्तपुरम
स्थित भगवान पद्मनाभ स्वामी (विष्णु भगवान) का मंदिर अकूत सम्पदा जो लगभग एक लाख
करोड के आस पास मानी जाती है, का स्वामी है | इस पर केरल सरकार कि गिद्ध दृष्टि है
| ये वो संपत्ति है जिसे हिन्दू सदियों से अपने इष्ट भगवन विष्णु को श्रधा पूर्वक चढ़ाता आ रहा है | जिसका हाल ही में खुलादा हुआ था | सुप्रीम कोर्ट ने अपनी देख रेख में इस संपत्ति की जांच और मूल्याङ्कन करने का कार्य शुरू किया | सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा की ये संपत्ति मंदिर और उस राजपरिवार की है जिसने इसे बनवाया था | इस सम्पदा के मंदिर से गायब होने कि आशंका प्रबल हो गयी है | ये आशंका न्यायालय कि
सहायता हेतु नियुक्त अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम ने अपनी ३५ दिनी जांच के बाद
उच्चतम न्यायालय को दी रिपोर्ट में कि है |
दरअसल इस भारी खजाने का पता जुलाई
२०११ में लगा था | तब इसकी जांच को उच्चतम न्यायालय ने ही मूल्यांकन का काम अधिवक्ता
गोपाल सुब्रह्मण्यम को सौंपा था | मंदिर प्रांगण में गोल्ड प्लेटिंग मशीन के मिलने
से खजाना गायब होने कि शंका को और बल मिलता है | मशीन के माध्यम से असली स्वर्ण
आभूषणों को या तो गायब कर दिया या नकली में बदल दिया गया | अभी तक ६ तहखानो ‘ए’ से
‘एफ’ तक के खजानों कि जांच कि जा चुकी है | गोपाल सुब्रह्मण्यम के अनुसार दो तहखाने
‘जी’ और ‘एच’ के भी होने और उनके खोलने कि भी मांग अधिवक्ता ने कि है, जिसका काफी
विरोध हुआ | गोपाल सुब्रह्मण्यम ने मंदिर के खातों में भी गडबडियाँ पायीं जिनकी
जांच पूर्व नियंत्रक एवं रक्षा लेखा परीक्षक से कराने कि मांग कि है | इनके आलावा ३०
साल से दानदाताओं के दिए पैसे कि भी गिनती नहीं हुयी है | महत्वपूर्ण बात ये है कि
केरल सरकार को मंदिर अपने हाथ में लेने वाले केरल उच्च न्यायालय के निर्णय पर
सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा रखी है | यहाँ ये बताना भी आवश्यक है कि मंदिर
त्रावनकोर राजपरिवार के कुल देवता पद्मनाभ स्वामी का है तथा राजपरिवार ने अपना
पूरा साम्राज्य भगवान को समर्पित कर दिया था ||

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